शत्रु को पीड़ा

आज में साधक मित्रो के लिए शत्रु को पीड़ा देने का शक्तिशाली मंत्र लेकर आया हु,इस मंत्र की सिद्धि तामसिक क्रिया से होगी और स्मशान भूमि पर इस मंत्र की सिद्धि होगी,इस मंत्र की गिनती काला जादू में होती हे इसलिए साधक को मंत्र सिद्धि सोच समजकर ही करनी पड़ेगी, बिना वजह किसी पर इस मंत्र का प्रयोग नहीं करना हे जब आपको लगे की मेरा शत्रु मुझे हद से ज्यादा हेरान करने लगा हे किसीकी बात नहीं मानता हे तो आपको इसका प्रयोग करना चाहिए,

ये मंत्र शत्रु को पीड़ा देने का तीव्र मंत्र हे इस मंत्र से शत्रु का विनाश भी हो सकता हे,तो चलिए विस्तार से जानते हे शत्रु को पीड़ा देने का मंत्र कैसे सिद्ध होता हे और उसका प्रयोग कैसे होता हे उसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हे,

शत्रु को पीड़ा

मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं ल्कीं त्रपुर भैरूं त्रपुर बीर मम

शत्रु अमुकस्य पीड़ा कुरु कुरु स्वाहा!!

विधि-

इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए साधना ११ दिन की होगी और साधना स्मशान में करनी पड़ेगी,साधना का प्रारम्भ मंगलवार से रात १२ बजे के बाद होगा,काली हकिक की माला से उपर्युक्त मंत्र की ३ माला करनी पड़ेगी,साधना के दरमियान साधक को ५ अगरबत्ती जलानी हे और भोग में कलेजी लेकर जाना हे ये भोग आपको पहले दिन और साधना के आखरी दिन ही लेकर जाना हे जब मंत्रजाप पूरे हो जाये तो घर पर आकर स्नान कर ले फिर दूसरा कार्य करे,इस तरह ११ दिन तक साधना करने से मंत्र सिद्ध हो जाएगा,

प्रयोग

जब किसी दुश्मन पर इसका प्रयोग करना हो तब दुश्मन के दाहिने पग की मिटटी लेकर आना हे और उस पर १०८ मंत्र बोलकर मंत्र में जहा अमुक शब्द आता हे वहा दुश्मन का नाम लेना हे और उस मिटटी को आग में तपाना हे ऐसा करने से दुश्मन बहुत हेरान हो जायेगा और आपको हेरान करना छोड़ देगा,

इस तरह साधक शत्रु को पीड़ा देने के लिए इस मंत्र का प्रयोग कर सकता हे.

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