ध्वजारोहण मंत्र साधना एक पौराणिक और तांत्रिक प्रयोग है जिसमें ध्वज को आत्मिक और आध्यात्मिक शक्ति के साथ स्थापित किया जाता है। इसके द्वारा ध्वज को एक योग्य साधक द्वारा प्रयोग किया जाता है ताकि यह देवी-देवताओं या इष्ट देवता की प्रतीक रूप में स्थापित हो सके। ध्वजारोहण मंत्र साधना की सम्पूर्ण विधि निम्नलिखित रूप में हो सकती है:
आज में आपको इस पोस्ट के जरिये ध्वजारोहण कैसे होता हे उसकी पूजा कैसे होती हे उसके बारे में विस्तार से चर्चा करूँगा,
मंत्र
ॐ णमो अरिहंताणं स्वस्ति भद्रं भवतु। सर्व लोक शान्ति भवतु स्वाहा।
ध्वजारोहण करना हो तब उपर्युक्त मंत्र का १०८ बार पाठ करे,
स्थान चुनें:
ध्वजारोहण करने के लिए स्थान का चयन करें। यह स्थान पवित्र और शुद्ध होना चाहिए।
संकल्प लें:
स्थान पर पहुंचने के बाद, संकल्प लें कि आप ध्वजारोहण करने की संकल्प ले रहे हैं और इससे आपके लक्ष्यों की प्राप्ति होगी।
ध्वज की तैयारी:
एक सामान्य रंगीन पट्टी को ध्वज के रूप में चुनें। ध्वज को इस पट्टी पर तैयार करें। यदि संभव हो तो ध्वज में स्वस्थ और प्राकृतिक रंग का उपयोग करें।
मंत्रों का पाठ करें:
ध्वजारोहण के समय, विशेष मंत्रों का पाठ करें। इन मंत्रों का चयन आपके इष्ट देवता के अनुसार किया जाता है। इस प्रक्रिया में तन्त्रिक मार्गदर्शन अथवा अध्यात्मिक गुरु की सलाह लेना संज्ञान में ले।
ध्वजारोहण करें:
मंत्रों का पाठ करने के बाद, ध्वज को स्थान पर स्थापित करें। ध्वज को धरती में बांधें या इसे एक ऊँची स्थान पर स्थापित करें जिससे यह दूसरों द्वारा देखा जा सके।
पूजा करें:
ध्वज को स्थापित करने के बाद, ध्वज की पूजा करें। ध्वज के साथ जल, दीप, फूल आदि का उपयोग करके पूजा करें।
अर्पण करें:
ध्वज को स्थापित करने के बाद, अपनी इच्छाओं और प्रार्थनाओं को ध्वज में अर्पित करें। इसके बाद, अपने मन और आत्मा को शुद्ध करके अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समर्पित हों।
ध्वजारोहण का समापन:
पूजा और अर्पण के बाद, ध्वजारोहण समाप्त करें। आप ध्वज को धरती से हटा सकते हैं और इसे एक सुरक्षित स्थान पर संग्रहित कर सकते हैं या ध्वज को अपने अल्टर में स्थापित कर सकते है
ध्वजारोहण मंत्र साधना और उसकी विधि का अनुसरण करके आप ध्वजारोहण कर सकते हो.
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