कुण्डलवती भूतनी साधना मुख्यतः धन दौलत और ऐश्वर्य के लिए की जाती हे,ये शक्ति ऐसी हे जिसका साधना करने का कोई विधि विधान नहीं हे पर साधक को मन में दृढ संकल्प लेकर साधना करनी चाहिए अगर कुण्डलवती भूतनी साधक पर प्रसन्न हो जाये तो वो साधक के सामने ३ दिन में प्रगट हो जाती हे वरना उसको प्रसन्न करने में साधक के पसीने छुट जाते हे,
भूतनी की साधना आप निश्वार्थ भाव से करोगे तो आपको जरुर सफलता मिल सकती हे,अगर आप ये साधना करना चाहते हो तो आपको ऐसे गुरु का चयन करना होगा जिसने कुण्डलवती भूतनी की साधना की हे और उसके पास साधना का अनुभव हे ऐसे गुरु के मार्गदर्शन में रहकर साधना करोगे तो आपको सफलता जल्द से जल्द मील सकती हे,
भूतनी साधक की कसोटी भी लेती हे किसी न किसी रूप में आकर साधक की कसोटी लेती हे अगर साधक उसकी कसोटी में सफल हो जाता हे तो कुण्डलवती भूतनी उस साधक की गुलाम बन जाती हे और जो साधक बोलता हे वो काम चुटकी में कर देती हे,
तो चलिए विस्तार से जानते हे कुण्डलवती भूतनी साधना कैसे होती हे और उसका विधि विधान क्या हे उसके बारे में चर्चा करते हे,
मंत्र
ॐ ह्रों कृ कृ कृ कटु कटु ॐ कुण्डलवती कृ कृ कृ ॐ श्र: ।।
साधन विधि-
रात्रि के समय स्मशान में बैठकर उपर्युक्त मंत्र का आठ सहस्त्र की संख्या में जाप करे। पुज्नादी की क्रिया पूर्वोकत प्रकार से करनी चाहिये। जब तक देवी प्रकट न हो तब तक जाप करना चाहिये।
जीस समय कुण्डलवती भूतनी साधक के समीप प्रकट हो, उस समय साधक को चाहिये कि उस रक्त से अधर्य दे। इस प्रकार देवि प्रसन्न होकर माता के समान साधक् की रक्षा करती है और उसे पच्चीस स्वर्ण मुदा प्रदान करती है।
इस तरह साधक कुण्डलवती भूतनी साधना की साधना करके उसकी सिद्धि हासिल कर सकता हे और अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकता हे.
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