कुमारिका भूतनी

भूतनी साधना करने के लिए साधक में निडरता और कलेजा होना चाहिए ये साधना कोई मामूली साधना नहीं हे साधना के दरमियान साधक को बहुत विचित्र अनुभव होते हे,डरावने सपने आते हे डरावने अनुभव होते हे अगर साधक इन सब परिश्थिति का निडरता से सामना करेगा तो वो सफलता प्राप्त कर सकता हे,आज में आपको कुमारिका भूतनी साधना देने वाला हु जिसको सिद्ध करके साधक बड़े से बड़ा तांत्रिक बन सकता हे,इस साधना करने से भूतनी देवी प्रत्यक्ष रूप में आकर दर्शन देती हे और साधक को इच्छित वरदान और वचन देती हे,

तो चलिए विस्तार से जानते हे कुमारिका भूतनी साधना कैसे होती हे और उसका विधि विधान क्या हे उसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हे,

कुमारिका भूतनी

मंत्र

ॐ ह्री कृ कृ कृ कटु कटु ॐ कुमरिके कृ कृ कृ ॐ श्र:

साधन विधि-

रात्रि  के  समय  किसी देव  मन्दिर में जाकर उत्तम  शेया  बनाकर  चमेली  के पुष्प,वस्त्र तथा चन्दन से पूजा  कर, गूगल की धूप देकर उक्त मन्त्र का आठ सहस्त्र की संख्या में जाप करे।

जब  तक  देवी  प्रकट  न  हो, तब तक जाप करना  चाहिए। प्रसन्न होने के दिन कुमारिका भूतनी साधक  के  समीप आकर उसका चुम्बन,आलिंगन श्रदि करके प्रसन्नता  प्रदान करती है तथा सुसज्जित पत्नी रूप में  सहवास  आदि  से  संतुष्ट कर, साधक को आठ स्वर्ण  मुद्रा  वस्त्र तथा सुन्दर भौजन-ये सब वस्तुय तथा कुबेर के घर से धन लाकर देती है।

इस  प्रकार  प्रतिदिन  रात्रि  भर  साधक के समीप रहकर, प्रातः काल चली जाती है।

इस तरह साधक कुमारिका भूतनी साधना करके उसकी सिद्धि हासिल कर सकता हे और इसकी सिद्धि हासिल करके साधक षट कर्म भी आसानी से कर सकता हे कोई भी तंत्र क्रिया आसानी से कर सकता हे किसी भी तंत्र की काट कर सकता हे,(उपर्युक्त मंत्र को जागृत रखने के लिए साधक को ग्रहण काल या काली चौदस के दिन उपर्युक्त मंत्र की २१ माला करनी हे ताकि मंत्र की शक्ति जागृत रहे)

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