अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी साधना

कभी कभी हमारे जीवन में ऐसे संकट आ जाते हे इसका हल नहीं हो पाता चाहे लाख कोशिश करे, मनुष्य जीवन हे तो संकट तो आते ही हे पर कोई संकट ऐसा होता हे जो जीना हराम कर देता हे, में आज इस पोस्ट में अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी साधना लेकर आया हु जो साधक तमाम अशुभ संकट हे उसका आसानी से विनाश करती हे,

अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी की खासियत ये हे की वो सिर्फ अशुभ संकट को विनाश करती हे, यक्षिणी बहुत प्रकार की होती हे इनमे से ये यक्षिणी साधक के हर संकटो का विनाश करती हे,

सब लोग आज यक्षिणी की साधना करना चाहता हे पर उसको पता नहीं होता की कोन सी यक्षिणी की साधना करे पर मेरा कहना ये हे की आप दूसरी यक्षिणी की साधना कर सकते हो पर ये साधना आपके जीवन को सुखमइ बनाने वाली साधना हे,ये साधना कोई भी कर सकता हे ज्यादा कठिन भी नहीं हे और सात्विक हे,

तो चलिए विस्तार से जानते हे अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी साधना के बारे में साधक इसकी सिद्धि प्राप्त करके अपने दुःख और संकट को आसानी से मिटा सकता हे.

अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी साधना

मंत्र:-

“ॐ क्लीं नमः।”

साधन विधि-

इस साधना करने के लिए आपको एकांत जगह की जरुरत पड सकती हे,मंत्रजाप एक लाख करना पड़ेगा और ये मंत्रजाप आप एक दिन में ना कर सको तो आप ये साधना ३ दिन तक कर सकते हो,

धात्री (आँवला)  वृक्ष  की जड़ में बैठकर  उक्त मंत्र का एकाग्रचित्त से १००००० जप करने से अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी प्रसन्न होकर  साधक के सभी   अशुभों (प्रमंगलों) का विनाश  करती  हे।

इस तरह साधक अशुभ क्षयकारिणी यक्षिणी साधना को सम्पन्न कर सकता हे और अपने जीवन में आनेवाली बाधा को आसानी से दूर कर सकता हे,एक बार ये यक्षिणी की साधना हो जाये तो कोई भी संकट आपके जीवन में नहीं आयेंगे क्योकि ये यक्षिणी संकटो का विनाश करने में माहिर हे.

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